पहले चरण में 100 जिलों में खुलेंगे सेंटर, चैम्पियन खिलाड़ी देंगे ट्रेनिंग; साई 10 लाख रुपए देगा - SPORTS NEWS

Sports News: Find Latest Sports News, Cricket News, Tennis News, Football News, Live Scores, Hockey, and IPL 2019 Latest News

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Thursday, July 9, 2020

पहले चरण में 100 जिलों में खुलेंगे सेंटर, चैम्पियन खिलाड़ी देंगे ट्रेनिंग; साई 10 लाख रुपए देगा

जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाएं तलाशने और पूर्व चैम्पियन खिलाड़ियों की आय का सोर्स निश्चित करने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) चार साल में एक हजार छोटे खेलो इंडिया सेंटर बनाने जा रहा है। पहले साल में 100 जिलों में सेंटर बनाने की योजना है। इसके बाद हर साल 300 सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटर का संचालन पूर्व चैम्पियन खिलाड़ी या एनआईएस कोच करेंगे। वे अपने जिले में एक सेंटर का प्रस्ताव भेज सकते हैं।

इस योजना के पहले चरण के तहत साई ने सेंटर चुनने के लिए राज्यों से प्रस्ताव मंगाए हैं। फिर खेल विभाग के अधिकारी उन प्रस्तावों से सर्वश्रेष्ठ का चयन कर साई के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजेंगे। वहां साई की टीम देशभर से सेंटर का चयन करेगी। मप्र के खेल संचालनालय ने जिलों से 20 जुलाई तक प्रस्ताव मांगे हैं।

खेलो इंडिया के मेडलिस्ट भी सेंटर खोल सकते हैं
पूर्व चैम्पियन की पहचान करने के लिए एक व्यवस्था तैयार की गई। ताकि ये चैम्पियन या तो खुद की अकादमी खोलकर उसे संचालित करें या फिर कोच के रूप में काम करें। पहली प्राथमिकता उन खिलाड़ियों को दी जाएगी, जिन्होंने मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल टूर्नामेंट में नेशनल फेडरेशन की ओर से हिस्सा लिया हो। इसके अलावा सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप या खेलो इंडिया के मेडलिस्ट भी अकादमी खोलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नेशनल ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के मेडलिस्ट को तीसरे वर्ग में रखा गया है। वहीं, सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को चौथे वर्ग में रखा है। इन्हें भी सेंटर खोलने की पात्रता है।

कोचिंग पर एक सेंटर तीन लाख रुपए तक खर्च कर सकता है
साई पूर्व चैम्पियन खिलाड़ी या कोच को दस लाख रुपए देगी। इसमें एकसाथ पांच लाख रुपए सेंटर खोलने के लिए दिए जाएंगे जबकि दूसरे पांच लाख रुपए अगले चार सालों के लिए दिए जाएंगे। इनमें से खिलाड़ी/कोच अपने सेंटर में जरूरत पड़ने पर तीन लाख रुपए सैलरी तक के असिस्टेंट कोच नियुक्त कर सकता है। शेष दो लाख रुपए की राशि सेंटर के रखरखाव, खेल उपकरण, खेल के आयोजन और खेल किट के लिए खर्च की जाएगी।

सेंटर संचालक नए खिलाड़ियों से न्यूनतम फीस भी ले सकता है। चार सालों के बाद पूर्व चैम्पियन खिलाड़ियों की पहचान स्थापित प्रशिक्षक के रूप में हो जाएगी। ऐसे में वे खुद के संसाधनों से केंद्र का संचालन जारी रख सकेंगे। पूर्व खिलाड़ी विकासखंड एवं जिला स्तर पर सरकारी या गैरसरकारी स्कूल, कॉलेज, संस्था व अन्य खेल इंन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एमओयू साइन करना होगा।

सिर्फ ओलिंपिक में खेले जाने वाले खेलों की ट्रेनिंग मिलेगी
एक सेंटर में एक खेल की ट्रेनिंग मिलेगी। केवल ऐसी संस्था ही 3 खेलों का प्रस्ताव भेज सकती हैं, जो 5 सालों से खेलों के क्षेत्र में काम कर रही है। इन सेंटर में वे 15 खेल होंगे, जो ओलिंपिक में खेले जाते हैं। इनमें तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, साइक्लिंग, फेंसिंग, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, स्वीमिंग, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल हैं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
खेल मंत्री किरण रिजिजू (बीच में) ने मार्च में खेलो इंडिया विंटर गेम्स का उद्घाटन किया था।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31XtA0F

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages