वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कहा- ट्रेनिंग के दौरान क्षमता से 70-75 प्रतिशत ज्यादा वजन उठा रही हूं, वेट कंट्रोल में रखने के लिए कोच अलग से हॉस्टल में खाना बनाते हैं - SPORTS NEWS

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Friday, January 10, 2020

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कहा- ट्रेनिंग के दौरान क्षमता से 70-75 प्रतिशत ज्यादा वजन उठा रही हूं, वेट कंट्रोल में रखने के लिए कोच अलग से हॉस्टल में खाना बनाते हैं

नई दिल्ली (राजकिशोर).भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू का टोक्यो में ओलिंपिक खेलना तय है। इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग फेडरेशन (आईडब्ल्यूएफ) द्वारा जारी क्वालिफायर रैंकिंग में वे 48 किग्रा कैटेगरी में आठवें नंबर पर हैं। टॉप-8 खिलाड़ियों में चीन की तीन खिलाड़ी हैं। ओलिंपिक में एक वेट कैटेगरी में एक देश से एक ही खिलाड़ी हिस्सा ले सकता है। ऐसे में मीराबाई का ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करना पक्का है। उनके सिर्फ एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से वे ओलिंपिक में क्वालिफाई कर लेंगी। एशियन चैंपियनशिप अप्रैल में होनी हैं। चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर टोक्यो में क्वालिफाई करने के लिए मीराबाई इन दिनों पटियाला में ट्रेनिंग कर रही हैं। वे क्षमता से 70-75 फीसदी ज्यादा वजन उठा रही हैं। मीराबाई चानू से उनकी तैयारियों के बारे में जाना। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल: एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप को लेकर तैयारी कैसी है? कोच ने आपके लिए क्या रणनीति बनाई है?
जवाब: इंजरी के बाद वापसी करते हुए भारत के चीफ कोच विजय सर की निगरानी में पटियाला में कैंप में प्रैक्टिस शुरू कर दी है। विजय सर ने एशियन चैंपियनशिप को ध्यान में रखते हुए ही मेरे लिए रणनीति बनाई है। उन्होंने ट्रेनिंग में धीरे-धीरे मेरा वर्कलोड बढ़ाना शुरू कर दिया है। ताकि मैं अप्रैल से पहले पूरी क्षमता हासिल कर सकूं। अभी मैं अपनी क्षमता से 70 से 75 फीसदी तक ज्यादा वजन उठा रही हूं। वजन उठाते समय कोच सर धीरे-धीरे वजन के बार बढ़ाते जाते हैं। ताकि अप्रैल से पहले मेरी क्षमता 90-95 फीसदी तक बढ़ जाए। फिटनेस के लिए रोजाना सुबह 7 से 8 बजे तक रनिंग और एक्सरसाइज करती हूं। फिर ब्रेकफास्ट के बाद सुबह 10 से 12 बजे तक, इसके बाद शाम 4 से 7:30 बजे तक वेट ट्रेनिंग करती हूं।

सवाल:वेटलिफ्टिंग में खिलाड़ी के लिए डाइट की क्या भूमिका है? क्या कोच ने कोई खास डाइट चार्ट तैयार किया है?
जवाब:वेटलिफ्टिंग में सही डाइट लेना बहुत जरूरी है। इसके खिलाड़ी को अपना वेट सही रखना अनिवार्य होता है। हर इवेंट के पहले खिलाड़ी का वजन नापा जाता है। वजन ज्यादा होने से खिलाड़ी डिस्क्वालिफाई हो जाता है जबकि कम होने से चुनौती कम हो जाती है। ऐसे में कोच सर ने मेरे लिए अलग से डाइट चार्ट बनाया है। मेरा और दो अन्य खिलाड़ियों का खाना मेस से अलग बनता है। पहले मैं भी मेस में ही खाती थी। लेकिन अब हम तीन लोगों के लिए जूनियर कोच अलग से हॉस्टल में खाना बनाते हैं। मुझे वजन कम करना था, इसलिए जरूरी था कि मेरे खाने में तेल-मसाला कम हो। साथ ही खाना प्रोटीनयुक्त हो। ब्रेकफास्ट में सिर्फ फल खाती हूं। लंच में मछली और सलाद ज्यादा खाती हूं। रात में नाॅनवेज लेती हूं।


सवाल:चोट के कारण वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में नहीं खेल सकीं। चोट से रिकवरी कैसे की?
जवाब:मैंने मुंबई में चार महीने स्पेशलिस्ट की निगरानी में रिहैब किया। लेकिन बैक की दिक्कत दूर नहीं हो पा रही थी। डॉक्टरों को दर्द का सही कारण पता नहीं चल पा रहा था। उस समय मैं नकारात्मक हो गई। लग रहा था कि करिअर खत्म हो जाएगा। नर्वस हो गई थी। लेकिन उस दौरान फेडरेशन, कोच और पेरेंट्स ने साथ दिया। पेरेंट्स रोजाना बात कर मुझे मोटिवेट करते। कोच से भी रोजाना बात होती। इन सभी के साथ से ही मेरा वेटलिफ्टिंग में वापसी करना संभव हो सका है।


सवाल:एशियन चैंपियनशिप में किस देश के खिलाड़ियों से चुनौती मिलेगी?
जवाब:एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में चीन और कोरिया की वेटलिफ्टरों से कड़ी चुनौती मिलेगी। चीन के तीन खिलाड़ी क्वालिफायर के टॉप रैंकिंग में भी हैं। अगर मैंने इनसे बेहतर किया तो ओलिंपिक में भी मेडल की उम्मीद बढ़ जाती है। इसलिए मेरा पूरा फोकस इस चैंपियनशिप पर है। उसी को ध्यान में रखकर अभ्यास कर रही हूं। इस बार मेडल के लिए पूरा दम लगा दूंगी।

सवाल:पुरुष खिलाड़ियों में किससे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है?
जवाब:17 साल के जेरेमी लालरिनुनगा से देश को काफी उम्मीदें हैं। वह युवा खिलाड़ी है। पिछली कुछ प्रतियोगिताओं में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है। मुझे उम्मीद है कि एशियन चैंपियनशिप के बाद उसकी वर्ल्ड रैकिंग में सुधार होगा और वह भी टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर सकेगा।

सवाल:रियो में डिस्क्वालिफाई हो गई थीं। इस बाद क्या बदलाव किया है?

जवाब:मैं 2016 रियो ओलिंपिक में मेडल नहीं जीत सकी थी। क्लीन एंड जर्क में वजन नहीं उठा सकी, इसलिए डिस्क्वालिफाई हो गई थी। लेकिन गलतियों से काफी सीखने को मिला है। वह मेरा पहला ओलिंपिक था। उस समय अनुभव भी कम था और काफी नर्वस भी थी। लेकिन अब मुझे अनुभव हो चुका है। रियो की गलतियों को न दोहराऊं, इसलिए कई बदलाव किए हैं। मेरा लक्ष्य ओलिंपिक मेडल जीतना है। इसलिए कैंप से घर भी नहीं जा रही हूं। आखिरी बार सितंबर में घर गई थी। रोजाना पेरेंट्स से बात कर तरोताजा महसूस करती हूं।



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वेटलिफ्टर मीराबाई चानू​​​​​​​ ।


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